Employee News: सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारियों की संतानों की संख्या को लेकर एक बड़ा मुद्दा उठ खड़ा हुआ है। हाल ही में, मप्र हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसमें दो से अधिक संतान होने पर सरकारी सेवा से बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगा दी गई है।
यह फैसला एक शिक्षक को राहत देने के लिए आया है, जिसकी नौकरी छीन ली गई थी। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और क्या हो सकते हैं इसके परिणाम।
मध्य प्रदेश (MP) में सरकारी कर्मचारियों के लिए दो से अधिक संतान होने पर बर्खास्तगी का मामला फिर चर्चा में है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस संबंध में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें एक शिक्षक की बर्खास्तगी के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी गई है।
कोर्ट ने माना कि संबंधित नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। इस फैसले से कई सरकारी कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जो इस नियम की चपेट में आ सकते थे।
हाईकोर्ट ने दिए अंतरिम राहत के आदेश
शिक्षक नसीर खान ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच (Single Bench) ने उनके पक्ष में अंतरिम आदेश जारी कर दिया।
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कोर्ट ने आयुक्त लोक शिक्षण (Commissioner of Public Instruction), जिला शिक्षा अधिकारी (District Education Officer) और अन्य संबंधित अधिकारियों को तलब किया है।
हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के दौरान पहले के समान मामलों के फैसलों को भी प्रस्तुत किया गया। याचिकाकर्ता (Petitioner) का तर्क था कि सरकारी परिपत्र में ‘उम्मीदवार’ शब्द का उल्लेख है, जबकि वह पहले से ही 1998 से सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। इसलिए, यह नियम उन पर लागू नहीं होना चाहिए।
दो से अधिक संतान होने पर बर्खास्तगी: क्या है नियम?
मध्य प्रदेश सरकार ने 10 मार्च 2000 को एक परिपत्र जारी किया था, जिसके अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के दो से अधिक जीवित संतान हैं और उनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, तो वह सरकारी सेवा के लिए पात्र नहीं होगा। इस नियम का उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना था।
हालांकि, इस नियम को लेकर कई सवाल उठे हैं। क्या यह नियम नौकरीपेशा व्यक्तियों के अधिकारों का हनन करता है? क्या संतानों की संख्या किसी व्यक्ति की योग्यता को प्रभावित कर सकती है? इन सवालों के बीच मप्र हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
क्या कहता है सरकारी नियम?
- मध्यप्रदेश सरकार का नियम कहता है कि किसी सरकारी कर्मचारी की दो से अधिक जीवित संतान होने पर, यदि उनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, तो वह सरकारी सेवा के लिए अयोग्य (Ineligible) माना जाएगा।
- यह नियम नए सरकारी कर्मचारियों पर लागू किया गया था, लेकिन इसका प्रभाव उन कर्मचारियों पर भी पड़ा, जो पहले से ही सेवा में थे।
- नसीर खान का तर्क था कि जब उन्होंने 1998 में नौकरी ज्वाइन की थी, तब यह नियम लागू नहीं था, इसलिए उन्हें इस आधार पर हटाया नहीं जा सकता।
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अन्य कर्मचारियों को भी राहत मिलेगी?
हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश भविष्य में ऐसे अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जिनकी नौकरी इसी आधार पर खतरे में पड़ सकती है। यदि कोर्ट आगे भी याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतिम फैसला देता है, तो सरकार को इस नीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।