रायपुर @ khabar Bastar। छत्तीसगढ़ में मुआवजा घोटाले (Compensation Scam) को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। पिछले दो दिनों में दो डिप्टी कलेक्टरों (Deputy Collector) को निलंबित कर दिया गया है।
यह कार्रवाई भारत सरकार की बहुप्रतीक्षित भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) के रायपुर-विशाखापट्टनम सिक्स लेन ग्रीन कॉरिडोर (Six Lane Green Corridor) में हुए करोड़ों के मुआवजा घोटाले के मामले में की गई है।
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दो दिनों में दो बड़े अफसरों पर गिरी गाज
सरकार ने बुधवार को कोरबा में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे (Shashikant Kurre) को निलंबित कर दिया। इससे पहले मंगलवार को तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू (Nirbhay Sahu) पर भी कार्रवाई हुई थी।
घोटाले का खुलासा होते ही राज्य सरकार ने तुरंत जांच के आदेश दिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी।
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324 करोड़ के घोटाले का मास्टरमाइंड!
शशिकांत कुर्रे पर आरोप है कि जब वे अभनपुर में तहसीलदार (Tehsildar) के पद पर थे, तब उन्होंने इस घोटाले को अंजाम दिया। उन्हें 324 करोड़ रुपये के इस मुआवजा घोटाले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
जांच में सामने आया है कि किसानों और जमीन मालिकों को गलत तरीके से अधिक मुआवजा दिलाने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया गया।
शशिकांत कुर्रे घोटाले के दौरान अभनपुर के तहसीलदार (Tehsildar) थे और वर्तमान में कोरबा (Korba) में पदस्थ हैं। उन पर 324 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल होने के गंभीर आरोप लगे हैं।
विधानसभा में मचा हंगामा, सरकार ने लिया कड़ा फैसला
इस घोटाले को लेकर विधानसभा (Chhattisgarh Vidhan Sabha) में जबरदस्त हंगामा हुआ। विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए जवाब मांगा।
इसके बाद सरकार ने तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू को मंगलवार को सस्पेंड कर दिया। अगले ही दिन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे पर भी निलंबन की गाज गिरा दी गई।
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?
भारत सरकार की भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम के बीच सिक्स लेन ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए किसानों को मुआवजा दिया जा रहा था।
जांच में पाया गया कि कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत करके मुआवजा राशि को जरूरत से ज्यादा बढ़ा दिया था। इस गड़बड़ी के चलते सरकारी खजाने को 324 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।