दंतेवाड़ा @ खबर बस्तर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा में चार कुख्यात माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें एक नक्सली दंपति भी शामिल है, जो कि रीजनल कंपनी नंबर 2 के सदस्य थे।
इन दोनों पर राज्य सरकार ने 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित किया हुआ था। इनके साथ ही एक अन्य माओवादी पर 3 लाख रुपये और एक महिला नक्सली पर 1 लाख रुपये का इनाम था।
आत्मसमर्पण करने वाले ये माओवादी पहले छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर 2018 में पुलिस पार्टी पर फायरिंग जैसी घटनाओं में शामिल थे। ग्राम तालपुर और थाना पामेड के अंतर्गत जंगल में इन माओवादियों ने पुलिस पार्टी पर गोलीबारी की थी।
आत्मसमर्पण का कारण: लोन वर्राटू अभियान और पुनर्वास नीति
राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे “लोन वर्राटू” (घर वापस आइए) अभियान और पुनर्वास नीति ने इन माओवादियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया है।
इस अभियान का उद्देश्य भटके हुए माओवादियों को मुख्यधारा में वापस लाना है। प्रशासन द्वारा लगातार नक्सल पुनर्वास नीति का प्रचार-प्रसार गाँव-गाँव तक किया जा रहा है।
इसके चलते कई माओवादी संगठनों के प्रमुख सदस्यों ने आत्मसमर्पण कर दिया है।
नक्सलियों का समाज से जुड़ने का निर्णय
नक्सलियों की अमानवीय और शोषणकारी विचारधारा, आदिवासी समाज पर अत्याचार, संगठनों के भीतर मतभेद और जंगलों में जीवन की कठिनाइयों से तंग आकर कई माओवादी अपने हथियार छोड़ने को मजबूर हुए हैं। समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की चाहत ने इन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया है।
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आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी
आइए जानते हैं उन चार नक्सलियों के बारे में जिन्होंने आत्मसमर्पण किया है:
- हुंगा तामो उर्फ तामो सुर्या – उम्र 37 वर्ष, रीजनल कंपनी नंबर 2 का सदस्य। यह विक्रमपल्ली, थाना जगरगुंडा, जिला सुकमा का निवासी है। उस पर 8 लाख रुपये का इनाम था।
- आयती ताती – उम्र 35 वर्ष, रीजनल कंपनी नंबर 2 की सदस्य और हुंगा तामो की पत्नी। वह सावनार गायतापारा की रहने वाली हैं और उन पर भी 8 लाख रुपये का इनाम था।
- देवे उर्फ विज्जे वंजाम – उम्र 25 वर्ष, उत्तर सब जोनल ब्यूरो की सदस्या और राजनीतिक टीम की सदस्य। मैलूर, थाना भेज्जी, जिला सुकमा की निवासी इस महिला पर 3 लाख रुपये का इनाम था।
- माड़वी आयते – उम्र 38 वर्ष, पूर्वी आरपीसी की केएएमएस (क्रांतिकारी आदिवासी महिला संगठन) की अध्यक्ष। चिन्नाबोड़केल, थाना चिंतलनार, जिला सुकमा की रहने वाली इस महिला पर 1 लाख रुपये का इनाम था।
पुनर्वास नीति के तहत सहायता
आत्मसमर्पित माओवादियों को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत 25,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
इसके साथ ही, उन्हें राज्य सरकार द्वारा रोजगार, प्रशिक्षण और आवास की सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में पुनर्वासित हो सकें।
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लोन वर्राटू अभियान की सफलता
बता दें कि “लोन वर्राटू” अभियान के तहत अब तक कुल 872 माओवादी, जिसमें 197 इनामी माओवादी शामिल हैं, आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इस अभियान ने नक्सलवाद से जुड़े लोगों को समाज के मुख्यधारा में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।
छत्तीसगढ़ सरकार की यह नीति माओवादियों को समाज से जोड़ने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो रही है। पुलिस अफसरों का मानना है कि आने वाले दिनों में और भी कई नक्सली समाज की मुख्यधारा में शामिल होंगे।