रायपुर @ खबर बस्तर। छत्तीसगढ़ में शुक्रवार 27 सितंबर को सरकारी कामकाज पूरी तरह से ठप होने जा रहा है। राज्य के हजारों अधिकारी और कर्मचारी अपनी 5 प्रमुख मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।
इस हड़ताल में अब शिक्षक भी शामिल हो गए हैं, जो सामूहिक रूप से अवकाश लेकर अपनी मांगों के समर्थन में उतरेंगे। इससे प्रदेश के कई सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में कामकाज पूरी तरह से रुक जाएगा।
यह भी पढ़ें:
Holiday News: 27 सितंबर को छुट्टी की घोषणा, प्रदेश में बंद रहेंगे सभी सरकारी दफ्तर! जानें वजह
इस बड़े आंदोलन का मकसद अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाना है, जो काफी समय से लंबित पड़ी हैं।
कलम बंद हड़ताल की घोषणा
अधिकारियों और कर्मचारियों ने 27 सितंबर को कलम बंद हड़ताल का ऐलान किया है। इसके तहत, सभी कर्मचारी और शिक्षक अवकाश लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के आंदोलन में शामिल होंगे।
इस दिन सरकारी कामकाज पूरी तरह से ठप रहेगा और शिक्षक भी सामूहिक अवकाश लेकर इस हड़ताल में अपनी भागीदारी देंगे।
स्कूलों पर पड़ेगा असर
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर स्कूलों पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि इस हड़ताल में हजारों शिक्षक भी शामिल हो रहे हैं। प्रदेशभर के स्कूलों में ताले लटक सकते हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
शिक्षक संघ भी अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्षरत हैं और इस आंदोलन के जरिए सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहे हैं।
क्यों है बड़ा आंदोलन ?
सरकारी कर्मचारी और अधिकारी लंबे समय से इन मुद्दों पर सरकार से बात कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी कारण कर्मचारी-अधिकारी संघ सरकार के खिलाफ हड़ताल का रास्ता अपना रहे हैं।
यह भी पढ़ें:
सामूहिक प्रदर्शन
27 सितंबर को प्रदेशभर के सरकारी कर्मचारी और शिक्षक अपने-अपने जिला मुख्यालयों पर सुबह 11 बजे से सामूहिक प्रदर्शन करेंगे। इस हड़ताल से पूरे राज्य में सरकारी दफ्तरों का कामकाज ठप हो सकता है।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अपने जरूरी काम 27 सितंबर से पहले निपटा लें, ताकि हड़ताल के दौरान उन्हें कोई असुविधा न हो।
कर्मचारी संघ की मुख्य मांगें
- महंगाई भत्ता (DA): केंद्र सरकार के समान 4% डीए 1 जनवरी 2024 से दिया जाए और जुलाई 2019 से देय एरियर्स का भुगतान जीपीएफ खाते में किया जाए।
- समयमान वेतनमान: सरकारी सेवकों को समयमान वेतनमान प्रदान किया जाए।
- गृह भाड़ा भत्ता (HRA): केंद्र सरकार के समान गृह भाड़ा भत्ता दिया जाए।
- अर्जित अवकाश नगदीकरण: मध्यप्रदेश की तर्ज पर सरकारी सेवकों के अर्जित अवकाश का नगदीकरण 300 दिनों के लिए किया जाए।
यह भी पढ़ें:
सभी संगठन लेंगे सामूहिक अवकाश
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि संगठन से जुड़े सभी शिक्षक और कर्मचारी संगठन सामूहिक अवकाश पर जा रहे हैं।
इस हड़ताल के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनकी लंबित मांगों पर विचार किया जा सके।
सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस निर्णय न लिए जाने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है, और यह हड़ताल उसी नाराजगी का परिणाम है।