अगर आपका चेक (Check Bounce) बाउंस हो जाता है, तो अब आपको केवल मामूली जुर्माना भरकर नहीं बचा जा सकेगा। हाईकोर्ट (High Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि चेक बाउंस के मामलों में दोषियों को चेक की राशि के बराबर जुर्माना चुकाना होगा।
इसके अलावा, उन्हें चेक जारी करने की तारीख से लेकर सजा के दिन तक 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इस आदेश का मकसद चेक बाउंस मामलों में एकरूपता बनाए रखना और पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाना है।
चेक बाउंस पर हाईकोर्ट की सख्ती
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि चेक बाउंस मामलों में अलग-अलग फैसले दिए जाते हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में भिन्नता आती है। इसे ध्यान में रखते हुए अदालत ने तय किया है कि हर मामले में चेक की राशि के बराबर जुर्माना लगाया जाए ताकि पीड़ित को पूरा हर्जाना मिल सके।
क्या है पूरा मामला?
बठिंडा निवासी जुगजीत कौर के खिलाफ चेक बाउंस का मामला दर्ज किया गया था। ट्रायल कोर्ट (Trial Court) ने उन्हें दो साल की कठोर सजा और 10,000 रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया था। लेकिन शिकायतकर्ता ने दावा किया कि आरोपी को 2015 में 19 लाख रुपये (Cheque Amount) देने थे, जो नहीं दिए गए।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल 10,000 रुपये का जुर्माना उचित नहीं है, क्योंकि यह चेक की राशि से बहुत कम है। अदालत ने निर्देश दिया कि इस तरह के मामलों में चेक की राशि के बराबर जुर्माना लगाना चाहिए, ताकि पीड़ित को पूरा मुआवजा मिल सके।
जुर्माने के साथ देना होगा ब्याज भी
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चेक बाउंस के मामलों में केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आरोपी को सजा के साथ-साथ 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह ब्याज चेक जारी करने की तारीख से लेकर अदालत के फैसले की तारीख तक जोड़ा जाएगा।
जुर्माना नहीं भरा तो क्या होगा?
अगर दोषी तय समय पर जुर्माना नहीं चुकाता है, तो उसे अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि अदालत जुर्माना तय करती है, तो उसे यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि जुर्माना चेक की राशि से कम न हो।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने इस मामले में कुछ महत्वपूर्ण बातें कही हैं:
- चेक बाउंस मामलों में एक समान जुर्माना लागू किया जाए।
- चेक की राशि के बराबर जुर्माना अनिवार्य हो।
- जुर्माने के साथ 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
- जुर्माना नहीं चुकाने पर अतिरिक्त सजा का प्रावधान होगा।
- मजिस्ट्रेट को जुर्माने की राशि चेक की रकम से दोगुनी तक रखने का अधिकार है।
ट्रायल कोर्ट को दोबारा सुनवाई का निर्देश
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत मानते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। अदालत ने कहा कि आगे से सभी न्यायिक अधिकारियों को इस फैसले का पालन करना होगा ताकि चेक बाउंस मामलों में एक समान न्याय मिल सके।