छत्तीसगढ़ में शिक्षकों को (Arrears Payment) एरियर्स भुगतान को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले के बाद पंचायत विभाग ने इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए सूरजपुर जिला पंचायत सीईओ को पत्र भेजा है।
इस पत्र में सात बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी गई है, ताकि भुगतान प्रक्रिया को सही तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी! लंबे इंतजार के बाद अब उनके एरियर्स भुगतान और क्रमोन्नत वेतनमान का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने जहां सरकार को झटका दिया, वहीं पंचायत विभाग ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। लेकिन क्या यह भुगतान आसानी से होगा?
82 लाख से ज्यादा की मांग और सात बिंदुओं पर जानकारी के साथ यह खबर शिक्षकों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई है। जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर!
एरियर्स भुगतान की राह आसान
छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए इंतजार की घड़ियां खत्म होने वाली हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले के बाद पंचायत विभाग ने एरियर्स भुगतान (Arrears Payment) की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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सूरजपुर जिला पंचायत के सीईओ को पत्र भेजकर सात महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। यह कदम शिक्षकों के हक में बड़ा बदलाव ला सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना गेमचेंजर
बिलासपुर में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी। इसके साथ ही क्रमोन्नत वेतनमान (Promotional Pay Scale) का रास्ता साफ हो गया। सरकार को अब शिक्षकों को उनका हक देना ही होगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले से सरकार पर करीब 75000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है। शिक्षकों के चेहरे पर अब उम्मीद की मुस्कान है।
सोना साहू प्रकरण ने खोला रास्ता
सोना साहू प्रकरण में कोर्ट के फैसले ने पूरे मामले को नई दिशा दी। इसके बाद पंचायत विभाग ने तुरंत कदम उठाते हुए सूरजपुर जिला पंचायत सीईओ को पत्र लिखा।
विभाग ने 192 कर्मचारियों के लिए 82 लाख 38 हजार 436 रुपये के भुगतान (Payment Demand) की मांग का परीक्षण शुरू किया है। यह राशि शिक्षकों के बकाया वेतन की पहली किश्त हो सकती है।
सात बिंदुओं पर जानकारी क्यों?
पंचायत विभाग ने सूरजपुर सीईओ से सात बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी है। इसमें कर्मचारियों की संख्या, बकाया राशि, और दस्तावेजों का सत्यापन (Document Verification) शामिल है।
विभाग का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भुगतान में कोई गड़बड़ी न हो। शिक्षकों को लग रहा है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी।
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सरकार पर 75000 करोड़ का आर्थिक दबाव
75000 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च सरकार के लिए चुनौती है। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि यह उनका अधिकार है, जिसके लिए वे सालों से लड़ रहे हैं।
सरकार अब वास्तविक राशि का आकलन (Amount Assessment) करने में जुट गई है। शिक्षकों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें उनका पैसा मिलेगा।